भीषण गर्मी की संभावना 2025 में ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में गर्मी का प्रकोप बढ़ सकता है। उच्च तापमान के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं, खासकर उत्तर भारत, राजस्थान, और गुजरात जैसे इलाकों में।
सूखा और जल संकट गर्मी के कारण कई राज्यों में पानी की कमी बढ़ सकती है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में जल संकट गंभीर रूप ले सकता है।
मॉनसून की तैयारी पर असर भीषण गर्मी से मानसून की प्रकृति भी प्रभावित हो सकती है। समय पर वर्षा न होने से किसानों को फसलों की बुआई में दिक्कतें आ सकती हैं।
हीटवेव (लू) का खतरा भारत में लू चलने की घटनाएं बढ़ सकती हैं, जिससे बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग को इससे निपटने के लिए विशेष तैयारियां करनी होंगी।
विद्युत संकट और बिजली कटौती गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ जाती है, जिससे कई राज्यों में पावर कट की समस्या उत्पन्न हो सकती है। एसी और कूलर के अधिक इस्तेमाल से ग्रिड पर दबाव बढ़ सकता है।
पर्यटन में गिरावट गर्मियों के दौरान कई पर्यटन स्थलों पर भीषण गर्मी के कारण पर्यटकों की संख्या कम हो सकती है। लोग ठंडी जगहों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में भीड़ बढ़ सकती है।
कृषि पर असर गर्मी के कारण गेहूं, धान और अन्य फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। पशुपालन और दूध उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।
बीमारियों का प्रकोप गर्मियों में पानी और खाने से जुड़ी बीमारियों जैसे डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, फूड पॉइजनिंग और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
समुद्र का बढ़ता तापमान समुद्रों और महासागरों का तापमान बढ़ने से चक्रवात बनने की संभावना बढ़ सकती है, जिससे भारत के तटीय क्षेत्रों में तूफान आने की आशंका होगी।
नई टेक्नोलॉजी और समाधान गर्मी से निपटने के लिए वैज्ञानिक नई तकनीकों पर काम कर सकते हैं, जैसे कि कूलिंग सिस्टम में सुधार, जल संरक्षण के नए तरीके, और क्लाइमेट-फ्रेंडली खेती के उपाय।